सहरिया जनजाति
परिचय:
सहरिया जनजाति उत्तर प्रदेश की एक विशेष और मान्यता प्राप्त अनुसूचित जनजाति (Scheduled Tribe) है। यह जनजाति मुख्यतः ललितपुर ज़िले के वनवर्ती और पठारी क्षेत्रों में पाई जाती है, जो बुंदेलखंड क्षेत्र का हिस्सा है। मध्य प्रदेश और राजस्थान की सीमा से लगे इस क्षेत्र में इनकी सांस्कृतिक और सामाजिक उपस्थिति प्राचीन काल से है।
मुख्य विशेषताएँ:
| विषय | विवरण |
|---|---|
| निवास क्षेत्र | ललितपुर (उत्तर प्रदेश), कुछ हिस्से झाँसी व आसपास के बुंदेलखंड क्षेत्र में |
| भाषा | सहरिया बोली (हिंदी की स्थानीय उपभाषा) |
| धर्म | हिंदू धर्म, साथ ही प्रकृति पूजक परंपराएँ |
| पेशा | दिहाड़ी मजदूरी, जंगल से लकड़ी व जड़ी-बूटी संग्रह, कृषि |
| सम्बंधित जनजातियाँ | भील, गोंड, कोल आदि से सांस्कृतिक समानताएँ |
सांस्कृतिक जीवन:
- सहरिया समाज पारंपरिक रूप से जंगलों पर आधारितजीवन जीता है — लकड़ी काटना, शहद इकट्ठा करना, और औषधीय जड़ी-बूटियाँ एकत्र करना इनकी पहचान रही है।
- त्योहारों पर सामूहिक नृत्य और लोकगीतों की परंपरा है, जिसमें ढोलक, मंजीरा आदि वाद्ययंत्रों का प्रयोग होता है।
- विवाह व जीवन रस्मेंप्रकृति और समुदाय के साथ गहराई से जुड़ी होती हैं।
- पारंपरिक पहनावा साधारण होता है, लेकिन स्त्रियाँ विभिन्न प्रकार के चांदी के आभूषण पहनती हैं।





