पनिका जनजाति
परिचय:
पनिका जनजाति उत्तर प्रदेश की एक मान्यता प्राप्त अनुसूचित जनजाति (Scheduled Tribe) है। यह जनजाति मुख्यतः सोनभद्र, मिर्जापुर, और आस-पास के क्षेत्रों में निवास करती है। पारंपरिक रूप से पनिका समुदाय करघा बुनाई यानी हाथ से कपड़ा बुनने के कार्य के लिए जाना जाता है। इनकी संस्कृति, भाषा और जीवनशैली में अद्भुत सादगी और आत्मनिर्भरता दिखाई देती है।
मुख्य विशेषताएँ:
| विषय | विवरण |
|---|---|
| निवास क्षेत्र | उत्तर प्रदेश: सोनभद्र, मिर्जापुर, चंदौली जिलों में प्रमुखता से |
| भाषा | हिंदी, भोजपुरी, गोंडी मिश्रित |
| धर्म | हिंदू धर्म, साथ में आदिवासी परंपराएं |
| पेशा | पारंपरिक बुनाई, खेती, मजदूरी |
| सम्बंध | कुछ क्षेत्रों में कोल या गोंड जनजातियों से सांस्कृतिक समानताएँ |
पारंपरिक व्यवसाय:
- “पनिका” शब्द की उत्पत्ति“पैनी (धागा या सूत कातना)”से मानी जाती है।
- यह समुदाय पारंपरिक रूप से कपड़ा बुनने (करघा चलाने) में निपुण रहा है, विशेष रूप से सूती वस्त्र बनाना इनकी पहचान रही है।
- हालांकि अब अधिकतर लोग खेती-बाड़ी और मजदूरी से भी जुड़े हैं।
संस्कृति और परंपराएँ:
- पनिका समाज सरल जीवन जीता है और छोटे परिवारों में रहता है।
- त्योहार जैसे होली, दीवाली, छठ, करमा आदि पूरे उत्साह से मनाते हैं।
- स्त्रियाँ पारंपरिक वस्त्र पहनती हैं और नथ, चूड़ी, कंठी आदि आभूषण पहनती हैं।
- इनके यहाँ लोकगीतों और पारंपरिक कहावतों की विशेष धरोहर होती है।
विशेष तथ्य:
- कुछ राज्यों में पनिका समुदाय को अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC)में भी वर्गीकृत किया गया है, लेकिन उत्तर प्रदेश में यह अनुसूचित जनजाति के रूप में मान्यता प्राप्त है।
- पारंपरिक बुनाई कला को संरक्षित करने के लिए हस्तशिल्प मेलों और सरकारी प्रशिक्षण कार्यक्रमों की आवश्यकता है।
- पनिका महिलाएँ पारंपरिक करघे चलाने में दक्ष होती हैं और ग्रामीण अर्थव्यवस्था में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।





