बुक्सा जनजाति
परिचय:
बुक्सा (Buksa या Bhoksa) जनजाति उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश की एक विशेष जनजातीय समूह है। उत्तर प्रदेश में यह जनजाति मुख्यतः बिजनौर औरसहारनपुर जिलों के तराई क्षेत्रों में पाई जाती है। यह जनजाति भारत की अनुसूचित जनजातियों (Scheduled Tribes – ST) में शामिल है।
मुख्य विशेषताएँ:
| विषय | विवरण |
|---|---|
| स्थान | बिजनौर, सहारनपुर (उत्तर प्रदेश) |
| भाषा | हिंदी, बुक्सा बोली (हिंदी की उपभाषा) |
| धर्म | हिंदू धर्म, साथ ही कुछ पारंपरिक आदिवासी धार्मिक मान्यताएँ |
| पेशा | कृषि, पशुपालन, मजदूरी |
| निवास शैली | झोपड़ीनुमा कच्चे मकान, अधिकतर गाँवों में निवास |
| परंपराएँ | लोकनृत्य, लोकगीत, पारंपरिक पूजा-पद्धति |
सांस्कृतिक जीवन:
बुक्सा जनजाति का सांस्कृतिक जीवन बहुत समृद्ध है। इनके लोकगीतों और नृत्य में प्रकृति, ऋतु, देवी-देवताओं और कृषि से संबंधित भावनाएँ प्रमुख रूप से दिखाई देती हैं। विवाह, जन्म, फसल कटाई जैसे अवसरों पर सामूहिक गीत और नृत्य किए जाते हैं।
- बुक्सा अथवा भोक्सा जनजाति उत्तर प्रदेश के बिजनौर जिले में छोटी-छोटी ग्रामीण बस्तियों में निवास करती है।
- बुक्सा जनजाति की पंचायत के सर्वोच्च व्यक्ति को तखत कहा जाता है
- उत्तर प्रदेश में बुक्सा जनजाति विकास परियोजना 1983-84 में प्रारंभ की गयी
- बुक्सा लोग प्रमुख रूप से हिन्दी भाषा बोलते हैं। इनमें जो लोग लिखना-पढ़ना जानते हैं वे देवनागरी लिपि का प्रयोग करते हैं।
- बुक्सा पुरुषों की वेशभूषा में धोती, कुर्ता, सदरी और सिर पर पगड़ी धारण करते हैं। नगरों में रहने वाले पुरुष गाँधी टोपी, कोट, ढीली पेन्ट और चमड़े के जूते, चप्पल आदि पहनते हैं। स्त्रियाँ पहले गहरे लाल, नीले या काले रंग की छींट का ढीला लहंगा पहनती थीं और चोली (अंगिया) के साथ ओढ़नी (चुनरी) सिर पर पहनती थीं, लेकिन अब स्त्रियों में साड़ी, ब्लाउज, स्वेटर एवं कार्कीगन का प्रचलन सामान्य हो गया है।




