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पटारी जनजाति

पटारी जनजाति

परिचय:

पटारी जनजाति उत्तर प्रदेश की एक मान्यता प्राप्त अनुसूचित जनजाति (Scheduled Tribe) है, जो मुख्यतः सोनभद्र जिले और इसके आसपास के वनवासी क्षेत्रों में निवास करती है। यह जनजाति वन-आधारित जीवन, सामूहिक संस्कृति, और सरल आजीविका की जीवनशैली के लिए जानी जाती है। पटारी जनजाति की उपस्थिति सीमित क्षेत्रों में ही है, जिससे यह एक कम प्रसिद्ध लेकिन विशिष्ट समुदाय के रूप में सामने आती है।

मुख्य विशेषताएँ:

 

विषय विवरण
निवास क्षेत्र उत्तर प्रदेश: मुख्यतः सोनभद्र जिले के पहाड़ी व जंगल क्षेत्र
भाषा हिंदी, भोजपुरी, गोंडी मिश्रित बोलियाँ
धर्म हिंदू धर्म और आदिवासी लोक आस्था का समन्वय
पेशा कृषि, मजदूरी, वनोपज एकत्रीकरण, पारंपरिक हस्तकला
जनजातीय स्थिति अनुसूचित जनजाति (उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त)

 

संस्कृति और परंपराएँ:

  • पटारी जनजाति के लोग प्रकृति पूजक होते हैं और वनदेवताओं, स्थानीय देवी-देवताओं की पूजा करते हैं।
  • ये लोग लोक पर्व जैसे करमा, सरहुल, होली, दीपावली आदि बड़े उत्साह से मनाते हैं।
  • स्त्रियाँ पारंपरिक पहनावे में सजती हैं और सामूहिक नृत्य-गीतों में भाग लेती हैं।
  • यह समुदाय सहजीवन की भावना और ग्राम सभा आधारित निर्णय प्रणाली में विश्वास करता है।

विशेष तथ्य:

  • पटारी जनजाति की सांस्कृतिक विरासत स्थानीय लोक जीवन से जुड़ी हुई है।
  • चूंकि यह जनजाति अपेक्षाकृत कम प्रचारित है, अतः इसके संरक्षण और अध्ययन की विशेष आवश्यकता है।