चेरो जनजाति
परिचय:
चेरो जनजाति उत्तर प्रदेश की एक प्रमुख अनुसूचित जनजाति (Scheduled Tribe)है। यह जनजाति मुख्य रूप से पूर्वी उत्तर प्रदेश के पहाड़ी और वनवासी क्षेत्रों, विशेषकर सोनभद्र, मिर्जापुर, और चंदौली जिलों में निवास करती है। चेरो समुदाय का एक गौरवशाली ऐतिहासिक अतीत भी रहा है —मध्यकाल में चेरो राजाओं ने झारखंड और बिहार के कुछ हिस्सों में शासन किया था।
मुख्य विशेषताएँ:
| विषय | विवरण |
|---|---|
| निवास क्षेत्र | उत्तर प्रदेश: सोनभद्र, मिर्जापुर, चंदौली जिले |
| भाषा | भोजपुरी, हिंदी, गोंडी मिश्रित बोली |
| धर्म | हिंदू धर्म एवं आदिवासी देवी-देवताओं की पूजा |
| पारंपरिक पेशा | कृषि, मजदूरी, वनोपज संग्रह |
| जनजातीय स्थिति | अनुसूचित जनजाति (ST) |
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि:
- चेरो जनजाति का इतिहास 12वीं–17वीं शताब्दी तक फैला हुआ है।
- यह जनजाति कभी झारखंड, बिहार, और उत्तर प्रदेश के कुछ हिस्सों में स्थानीय शासक वर्ग के रूप में जानी जाती थी।
- झारखंड के पालामऊ किला और उससे जुड़ा चेरो वंश प्रसिद्ध है।
संस्कृति और परंपराएँ:
- चेरो समुदाय लोक पर्वों जैसे सरहुल, करमा, होली, दशहरा, और दीवाली को पारंपरिक ढंग से मनाता है।
- इनकी संस्कृति में नृत्य, लोकगीत, और वाद्य यंत्र जैसे मादल, नगाड़ा आदि महत्त्वपूर्ण हैं।
- विवाह, जन्म और मृत्यु संबंधी रीति-रिवाजों में आदिवासी लोक परंपराओं की झलक मिलती है।




