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अध्यक्ष
श्री हरिओम
(I.A.S.)
सचिव संस्कृति (उ0 प्र0)
 

प्रस्तावित कार्यक्रम

 

जश्न- ए- आजादी ०१ एवं २ अक्टूबर २०१६

जश्न- ए- आजादी ०१ एवं २ अक्टूबर २०१६ स्थान- भारत रत्न श्री लालबहादुर शास्त्री पैतृक आवास रामनगर, वाराणसी

जश्न-ए-आजादी-

जश्न-ए-आजादी- विश्व आदिवासी दिवस से स्वतंत्रता दिवस तक (09 अगस्त से 15 अगस्त 2016 तक ) हम और हमारी आजादी- सात दशक 09 अगस्त, 2016 सायंकाल 4.30 बजे जश्न-ए-आजादी का शुभारम्भ- विश्वआदिवासी दिवस परिचर्चा, सम्मान, गायन/वादन/नृत्य, चित्रकला आदि - अस्सीघाट, वाराणसी 10 अगस्त, 2016 पूर्वाह्न 11 बजे आदिवासी चैपाल, चित्रकला, निबन्ध एवं देश भक्ति गीत आदि- वनवासी छात्रावास, वाराणसी 11 अगस्त, 2016 दोपहर 1 बजे देशभक्ति के गीत, फिल्म शो एवं परिचर्चा- पंचपेड़वां (रेउसां), चन्दौली 12 अगस्त, 2016 पूर्वाह्न 11 बजे गायन, वादन, नृत्य, फिल्म शो, चित्रकला, निबन्ध आदि- डगमगपुर, मिर्जापुर 13 अगस्त, 2016 दोपहर 12 बजे आदिवासी चैपाल, परिचर्चा एवं अन्य कार्यक्रम - जौनपुर 14 अगस्त, 2016 अपराह्न 2 बजे लोकगीत, परिचर्चा एवं अन्य सामयिक कार्यक्रम - सोनभद्र (राबटर््सगंज) 15 अगस्त, 2016 सायंकाल 4.30 बजे रंगारंग स्वतंत्रता दिवस समारोह- अस्सी घाट, वाराणसी

कार्यशाला

कजरी एवं पारम्परिक लोक गीत पर आधारित दिनांक 25 अगस्त, 2015 से 04 सितम्बर, 2015 तक पर आधारित स्थान- पं. कमलापति त्रिपाठी राजकीय स्नाकोत्तर महाविद्यालय, चन्दौली

वनवासी-

विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर दिनांक ०८ एवं ०९ अगस्त २०१५ अस्सी घाट वाराणसी

सांझी विरासत 2015

बुंदेली लोक नृत्य,गीत का अप्रतिम प्रस्तुति दिनांक २५-७-२०१५ लोहिया पार्क गोमती नगर लखनऊ

लोक संस्कृति

जश्न-ए-आजादी- विश्व आदिवासी दिवस से स्वतंत्रता दिवस तक (09 अगस्त से 15 अगस्त 2016 तक ) * जश्न- ए- आजादी ०१ एवं २ अक्टूबर २०१६ जश्न- ए- आजादी ०१ एवं २ अक्टूबर २०१६ स्थान- भारत रत्न श्री लालबहादुर शास्त्री पैतृक आवास रामनगर, वाराणसी * * * *

जनजाति एवं लोक कला संस्कृति संस्थान उ.प्र.
उद्देश्य

लोक कला जन-मानस कि विचारधारा, आत्म चिंतन एवं जीवन शैली की स्वाभाविक अभिव्यक्ति है , जो क्षेत्रीय सर्जना का अप्रतिम उदहारण प्रस्तुत करते हुए मानवीय मूल्यों के साथ अनुभूत , कल्पना एवं जन विश्वास का सम्मिश्रण है | सहजता, सादापन, सरलता एवं शांति प्रदान करना इनकी मूल विशेषता है | लोक कला के विभिन्न स्वरुप है जो ग्रामों एवं नगरों में विद्यमान है | इनके पृष्ठभूमि में लोक गाथा, लोक धर्म एवं लोक परंपरा महत्वपूर्ण भूमिका निर्वहन करते है, जो मूलतः प्रकृति पर निर्भर है, न कि बाज़ारवाद पर | पारिभाषिक रूप से 'लोक' का तात्पर्य ऐसी जनता जो अभिजात्य संस्कार, शास्त्रीयता, पांडित्य चेतना अथवा अहंकार से शून्य है तथा परंपरा के प्रवाह में जीवित है | भारतीय परंपरा में 'लोक' पूर्वजों एवं प्रकृति से जुड़ा हुआ है जो अतीत एवं वर्तमान से जुड़कर भविष्य के लिए सन्नध रहता है | "प्रत्यक्षदर्शी लोकानां सर्वदर्शी भवेन्न: " वस्तुतः लोक में अनुष्ठानिक कार्यों कि प्रधानता होती है, जिसमें चिंतन के व्यापक अर्थ निहित होते है तथा लोकहित का भाव उसके स्वरुप का निर्धारण करते है | लोक कला में उक्त चिंतन, भाव एवं अनुष्ठानों से जुड़े प्रदर्श एवं प्रसंग को नियोजित रूप से संरक्षित एवं संवर्ध्दित किया जाना संस्थान का मुख्य उद्देश्य है |

निदेशक

 

 डॉ. रत्नेश वर्मा

 

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विविध लोक कला

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